अम्मी कहों या कहो मां

उसके प्यार में कुछ अलग बात है
हर मार में एक अलग एहसास है
वो तड़प जाती है अपने बच्चो की खातिर
मगर बच्चे है जो उसे भुला जाते है

जिसके रहती है जन्नत कदमों के नीचे
जो दिलाती है एहसास खुदा के जैसे
वो बस है दुनिया में एक शख़्सियत ऐसे
जो कहलाती है मां, मम्मी , अम्मी के जैसे

मिलती नहीं प्यार मां की सबको इस कदर
छीन लेता है खुदा जब किसी बहाने से अगर
कर देता है तन्हा इस जहां में जब
कोई सौतेली नहीं कर सकती कमी पूरी तब